Sunday, October 15, 2017

अविस्कार क संकट (अविष्कार का संकट)

लघुकथा-6
अविस्कार क संकट
छात्र- गुरु जी, आप एतना जीतोड़ मेहनत क बाद रोबोटे के ब्रेन डिजाइन क नियम खोज लेले बानी, त ओकराके लोगन क सामने लियावत काहें नइखीं?
गुरुजी-बेटा, हम ई सोचत बानी कि कहीं इ हमनीके सभ्यता खातिर आत्मघाती न साबित हो जावS। पहिलहीं से संसार का संपत्ति क कुल्ह पूँजी 05% मनइन केहें बाटे। बकिया 95% मनई त एहसे जियत बा कि ऊ 05% मनइन के ओह सभ क जरूरत बा। जवदि ए जरूरत के मसीने (रोबोट) पूरा करे लागी त फिर ई 95% मनई त बिना मउअत के मर जईहें, एहसेकि मसीने के आपन साथी बनाके उ 05% मनई ई सबके लात मार दीSहें।
अविष्कार का संकट
छात्र- सर, आपने इतनी कड़ी मेहनत के बाद रोबोटिक ब्रेन डिजाइनिंग का सिद्धांत का खोज लिया है तो उसे लोगों के सामने क्यों नहीं ला रहे हैं?

प्राध्यापक : बेटे, मैं यह सोच रहा हूँ कि कहीं यह हमारी सभ्यता के लिए आत्मघाती साबित न हो। पहले से ही विश्व संपदा की कुल पूँजी 05% लोगों के पास है। शेष 95% लोग तो इसलिए जी रहे हैं कि उन 05% लोगों को उनकी जरूरत है। यदि इस जरूरत को मशीन (रोबोट) ही पूरा करने लगेगी तो फिर ये 95% लोग बेमौत मारे जाएँगे, क्योंकि मशीनों को अपना साथी बनाकर वे 05% लोग तुरंत इन सबको लात मार देंगे।

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